Sunday, April 15, 2012

सेरामिक स्टार वालो आज सब समस्या का समाधान हो की गलती किसकी रहती है और दोष किस के ऊपर मांड दिया जाता है ! कोई यहाँ दूध का धुला नहीं है ! और उल्टा चोर कोतवाल को डांट रहा है यहाँ पर


सेरामिक स्टार वालो आज सब समस्या का समाधान हो की गलती किसकी रहती है और दोष किस के ऊपर मांड दिया जाता है !
कोई यहाँ दूध का धुला नहीं है ! और उल्टा चोर कोतवाल को डांट रहा है यहाँ पर 

गाँव वाले हम ,बडप्पन जो दिखलाते है ,
क्षमा मांगते है भोलापन जो दिखलाते है!!
पर बात- बात में तुम अड़चन करते हो ,
हरे-भरे जख्मो पर खुरचन करते हो !!
फिर भी हम बडप्पन दिखलाते है ,
में सब का  आज सम्बोदन करता हूँ ,
देवियो तुम्हारे आगे निवेदन करता हूँ!!,
तुम्हारे प्रचंड प्रकोप से डरता हूँ ,
मै सब मै गाँव भावना भरता हूँ !!
""इनको तो गुड न दे पर गुड सी बात करे ,
इन पर तो बातो की बरसात करे""
तब जाकर इनका दिल खुश होता है ,
पर यह गाँव वालो मै मुश्किल होता है ,
मै दिल की बात करता हूँ ,पंकज, अंकित इशारा जान लेना तुम ,
मै कडवी बात करता हु ,मीठा नहीं खारा जान लेना तुम 

सेरामिक स्टार वालो आज सब समस्या का समाधान हो की गलती किसकी रहती है और दोष किस के ऊपर मांड दिया जाता है ! कोई यहाँ दूध का धुला नहीं है ! और उल्टा चोर कोतवाल को डांट रहा है यहाँ पर


सेरामिक स्टार वालो आज सब समस्या का समाधान हो की गलती किसकी रहती है और दोष किस के ऊपर मांड दिया जाता है !
कोई यहाँ दूध का धुला नहीं है ! और उल्टा चोर कोतवाल को डांट रहा है यहाँ पर 

गाँव वाले हम ,बडप्पन जो दिखलाते है ,
क्षमा मांगते है भोलापन जो दिखलाते है!!
पर बात- बात में तुम अड़चन करते हो ,
हरे-भरे जख्मो पर खुरचन करते हो !!
फिर भी हम बडप्पन दिखलाते है ,
में सब का  आज सम्बोदन करता हूँ ,
देवियो तुम्हारे आगे निवेदन करता हूँ!!,
तुम्हारे प्रचंड प्रकोप से डरता हूँ ,
मै सब मै गाँव भावना भरता हूँ !!
""इनको तो गुड न दे पर गुड सी बात करे ,
इन पर तो बातो की बरसात करे""
तब जाकर इनका दिल खुश होता है ,
पर यह गाँव वालो मै मुश्किल होता है ,
मै दिल की बात करता हूँ ,पंकज, अंकित इशारा जान लेना तुम ,
मै कडवी बात करता हु ,मीठा नहीं खारा जान लेना तुम 

Monday, March 5, 2012

गाँव का सम्पूर्ण जीवन

 गाँव का सम्पूर्ण जीवन पढना न भूले ,,,,,,आधी कल पढना
पांच साल बाद गाँव आया ,
देर्खा कितना बदलाव आया ,
वो पगल्या वाला झंडा ,
वो हरा भरा आमली का पेड़ ,
घर के आँगन में नीम पर 
अटका सूरज ,
वो मंदिर किनारे वाला हैंडपंप ,
कुछ भी न मिला ,
याद आते है वो दिन आज भी ,
मुंह पुछकर दोबारा प्रसाद खाना ,
तालब किनारे दोस्तों के चड्डी बनियान छुपाना ,
पुराने लोह ल्ख्ड को बेच आम खाना,
नयी किताबो से तरबूज खाना ,
अनाज लेकर चुस्की खाना ,
वो रोज छाछ पीना  ,
न होने पर पडोसी से केतली भर लाना,
नवरात्रा माँ घर घर जाकर माँगना ,
जय माता की बोलना ,
मेले से ॐ वाला ताबीज ,
हाथ पर नाम गुदवाना ,
मैले से सामान चुराना ,
कार चाबी भरकर दोडाना,
दोस्त से टक्कर करवाना ,
मांगी लाल के घर मिथुन की फिल्म देखना ,
एक दिन के लिए मिथुन बनकर 
दोस्तों से स्टाइल से लड़ना ,
दोस्तों को उसकी कहानी सुनाना ,
गोली मारने की धुन से डिस्काऊ करना ,
जागरण मै चाय पीने जाना ,
कभी सुपारी इलायची खाना ,
मिला मोका उठा सिगरेट,
गली में संजय दत्त  वाली 
स्टाइल में सूटा मारना ,
नाको से धुआ निकालना ,
खेतो मै मिट्टी लपेट नहाना ,
गुड मूंगफली जेब में भर ,
 दोस्तों को दिखाकर खाना  
उस बुद्दे को चिढाना ,
अलाव तापने के लिए पडोसी 
के कंडे चुराना ,
टायर घुमाना ,
माचिस ,फिल्मो वाले ताश खेलना ,
मंदिर से पैसे उठाना ,
भगवान् के आगे चढ़ा हुआ प्रसाद खाना,
उफनती नदी को छत से देखना  
तलाई मै चुपके नहाने जाना ,
मोर का सुबह बोलना ,
रामस्वरूप का बकरियों में जाना ,
टर टर कर उनको भगाना ,
दिल को सताना ,
कभी गिल्ली  कभी मारदाड़ी खेलना ,
खेतो से फलियों को इकट्ठा करना ,
दोस्तों से पढाई में जलना ,
चुपके से खिड़की से देखना,
आम के पेड़ से केरी तोडना ,
नमक लागकर खाना ,
कभी कोढियो से कभी 
इमली के बीजों से खेलना ,
वो कमर पे काले धागे पर ,
चाबियों का गुच्छा बांदना ,
आंकड़ो के पेड़ से ,
टूटी पतंग की डंडी से धनुष बाण बनाना ,
दीवाली पर गोबर में , कभी बोतल में 
कभी बेलो के पैर तले पटाखे छोड़कर भागना ,
होली पर गधे पर बेठना ,
कीचड़ , जले हुए आयल से होली खेलना ,
दोस्तों के कपडे फाड़ना ,
स्कूल की  लड़की के घर सामने 
नाचना ,पीपा बजाना शोर करना ,
राखी पर बहिना से राखी बंधवाकर ,
पैसे न देना ,
व्रत वाले दिन भूख लगी
 दिन में ही खाना खाना ,
पिचके वाले से पिचके खाना ,
साथ में सुखी पपड़ी जरुर खाना ,
भाभी की की सकी को छेड़ना ,
झोपडी पर मांडने मांडना ,
माँ को देखा मिट्टी से लेप करना ,
वो बीस पंजे वाला पिल्ला पालना ,








 

Friday, March 2, 2012

देश के हालात ,,,


देश के हालात ,,,
कब खत्म होंगे दिन अत्याचार  के ,
कब लोटकर आयेंगे दिन बहार के ,
हर वक्त किस्से सुनते भ्रष्टाचार के ,
हालात कब बदलेंगे सरकार के ,
गरीब हो रहे शिकार  लूटमार के
महंगाई जो गयी  भरमार के ,
हर मंत्री चोरी करता सेंधमार के ,
नहीं समझेंगे ये बोल सदाचार के ,
शासन छीन  लो लातमार के ,
(रामावतार नागर --जिला बूंदी ग्राम करवर राज .--9414370268)

Thursday, March 1, 2012

किसान का बेटा हूँ ,,,,,,,


किसान का बेटा हूँ ,,,,,,,
1---नहीं अमीरों की ओलाद,मै किसान का नंदन हूँ ,
फूलो से नहीं मिट्टी से करता अभिनन्दन हूँ ,
 मै धरनीधर का रोज करता वंदन हूँ ,
मिमयाती बिल्ली नहीं, शेरो की दहाड़ सी  मेरी क्रंदन है 
रोली कुमकुम का टिका  नही, मिट्टी मेरे लिए चन्दन है ,
खेती करना ही मेरे लिए पूजा अर्चन हें,
धीमी सी किलकारी मेरी हाथी की गर्जन है ,
 खेतो का नहीं एक एक व्रक्ष का करता अंकन हूँ ,
खेतो की हरयाली सा खिलखिलाता चमन हूँ 
नफरत की दीवार नहीं ,देश मै फेलाता अमन हूँ,
सिखाते रहना अन्धकार में ,यही करता नम्र निवेदन हूँ ,(ramavtar nagar –9414370268)


जय जय शिवराज सिंह चौ,,,,हान की ,,,,,,


जय जय शिवराज सिंह चौ,,,,हान की ,,,,,,
१-- बेटिया बचाओ जिसने चलाया अभियान ,
देश करता जिस  लाडले पर स्वाभिमान ,
जिसने बढाई मध्यप्रदेश  की शान ,
हर नारी का जिसने किया सम्मान ,
जिसने नागर मालव किराड़ को किया बलवान ,
राजस्थान के धाकड़ो का जिसने बढाया मान,
धाकड़ समाज की जिस में बसी है जान ,
वह शख्स है भाई शिवराज सिंह चौहान , (ramavtar nagar –9414370268)

गाँव वाली मेरी माँ ,,,,,,,,,,,,,


उठती है शुभवेला में ,
उठकर ,छाछ बिलोकर 
चाय बनाकर ,
जगाकर, मुझे पिलाती है ,
भेसो को चारा डालना ,
गोबर पानी करना ,
खाना बनाना ,
रोटी कपडे में बांदकर,
गुड प्याज रखकर ,
खेत पर ले जाती है ,
दिनभर खेतो में काम ,
शाम को चारा काट ,
पोटली बाँध
सर पर रखकर ,
गोधुलिवेला में ,
बैलो के पैर से उडती हुई
धुल के पीछे पीछे आती है ,
हारी थकी हुई ,
भेसो का दूध निकालती है ,
गर्म कर जावण देती है ,
कभी शकरकंद ,
तो कभी मूंगफली खिलाती है ,
फिर थपकी देकर मुझे सुलाती है