Saturday, February 18, 2012

क्यों बाँट दिया महीनो में ,,,,,,,,,,,,,,,,,

जिस माँ ने पाला था तुम्हे डूबकर पसीनो में ,
आज क्यों बाँट दिया जानबूझकर महीनो में ,
यह कुकर्म क्यों कर दिया भूलकर हसीनो में ,
नहीं सोचा था उसने ऐसा चाहकर सपनो में ,
की तुम्हे दुश्मन  आयेंगे नजर अपनों में ,
केसे पाला था तुझे उसे यादकर दिनों में ,
छुपाया था तुझे अपना समझकर सीनों में ,
केसी हेवानियत बस गयी आज रचकर दिलो में ,
रोज पढता रहता  हूँ , ऐसी घटना हर जिलो में ,
कुछ नहीं अंतर पढ़े लिखे और आदिवासी भीलों में ,
तुझे सुलाकर  सूखे में , खुद सोयी गिलों में ,
फिर क्यों फ़ेक आते हो बहती हुई झीलों में ,
क्यों छोड़ आते हो डरावने  खंडर किलों में ,
क्यों सुला देते हो जहरीले साप वाले बिलों में ,
इसलिए पागल हो जाती है रो -रोकर गिलों में ,
फिर भी काम करती रहती मजदूरी से मीलों में ,
पर  तुम कैसे मस्त रहते हो  फ़िल्मी रीलों में  ,
माँ का घुटता  दम रोज सवेरो में ,
खुद करते रज महल बसेरो में ,
छोड़ देते हो  माँ को कच्चे  झोपड़ो में ,
जहा रोज मरती है भुखमरी के थपेड़ो में ,
केसी हालत हो गयी माँ की गाँव शहरों में ,
दानव नजर आते है उसे तुम्हारे चेहरों में ,
बंद कर देते हो उसे जकड़कर संखिचो में ,
फिर  टहलते हो मस्त होकर बगीचों में ,
मार देते हो उसे लटकाकर जंजीरों से ,
 मन बहलाते हो केटरीना की तस्वीरो से ,
पर याद करो कितना मज़ा था माँ की दुलारों में ,
केसे मस्ती करते थे माँ की गोद भरी लहरों मे,
माँ डालती थी प्यार के  रस खीरो में ,
कितना दम था माँ की ताशीरो में  ,
जान तक फुक देती थी शहीद वीरो में ,
फिर क्यों बहा देते हो बुडापे में नहरों में, 
क्या यही लिखा था माँ के नसीबो में ,
भूल जाओगे उसे मस्त रहकर रकीबो में,
पर याद रखना माँ नजर आएगी दर्पणों में ,
जिन्दगी न्योछावर थी उसकी तेरे अर्पंनो में ,
चारो धाम बसते है माँ के चरणों में ,
माँ का बखान मिलेगा पुराणों में ,
पुराणो मे ही नहीं मिलेगा सोपुराणों में ,
  "जय माता दी "(रामावतार नागर ")








Friday, February 17, 2012

जय वीर तेजा के गाँव की ,,,,,,,,,,,,

सदियों  से जो लाज बचाता भारत माँ के आन की ,
चन्दन सी महके मिट्टी मेरे राजस्थान की ,
जंहा वीर तेजा का पवित्र खरनाल है ,
वचन पर प्राण लुटाने वाला इसका लाल है ,
परबतसर के टीलो पर टंगस्टन की खान है ,
इसके पशुमेले का हर जगह मिलता बखान है ,
ताजमहल पर जो चमक बिखेर करता दिवाली है ,
उस मकराने के संगमरमर की बात निराली है,
मेड़ता में मीरा का मंदिर बड़ा पुराना है ,
इसकी ही बेटी का सारा जग दीवाना है ,
यहाँ नागोरी बैलो की नस्ल पायी जाती है ,
यहाँ इरानी मस्जिदे असल पायी जाती है ,
दोस्तों क्षमा चाहता हूँ , मेरे पास किताब नहीं है , जितना जेहन में आया लिख दिया ,,

Thursday, February 16, 2012

जय जय बीकाणा,,,,,,,,,,,,,

सदियों से जो लाज बचाता भारत माँ के आन की ,
चन्दन से प्यारी हे  मिट्टी  मेरे राजस्थान की  ,
 पन्नो में लिखी कहानी जिसके स्वाभिमान की,
परवाह नहीं करते जहा वीर अपनी जान की ,
चन्दन से प्यारी है मिट्टी मेरे राजस्थान की ,
 विश्नोई गुरु जाम्भोजी का पवित्र मुकाम है ,
बीकानेर के शेरो से ही हिन्दुस्तान सलाम है ,
इसका ही  लाल अर्जुनसिंह दुनिया में ख्यातिनाम है ,
कोडम देशर के भेरू का जहा चमत्कारी धाम है ,
चार दीवारी का परकोटा जूनागढ़ बतलाता है ,
गंगासिंह बालपन में शेरो से  लड़ जाता है ,
रानी करनी ने अकबर पर तलवार चलाई थी ,
गंगा ने अपने दम से गंगनहर बनवाई थी ,
सिव्ण, बेर, सांगरी की अनोखी मिठास है ,
बीकाजी नमकीन का स्वाद बड़ा ख़ास है ,
अल्हजीरा के संगीत ने दुनिया में नाम कमाया था ,
 यहाँ जश्नाथियो ने अग्नि न्रत्य कर  बतलाया था ,
लालगढ़ का दुर्ग यहाँ यहाँ अपनी शान दिखाता है ,
बच्चे   बच्चे  को यह वीरो का गान  सिखाता है ,



Wednesday, February 15, 2012

जय जय राजस्थान री ,,,,,,,,,,,,

राजस्थानी अबलाओ ने अमर हिन्दुस्तान बना डाला ,
लाशें बिछाकर श्त्रानियो ने हर डगर श्मसान बना डाला ,
सिर काट हाड़ी रानी ने गोरव इतिहास बना डाला ,
अच्छे अच्छे वीरो का रणभूमि में उपहास बना डाला ,
चन्दन से बेटे को जिसने  बेजान सुला डाला ,
ऐसी पन्ना  सेवक ने दीपदान भुला  डाला ,
मीरा की भी गजब कहानी थी ,
प्रेम भक्ति में हुई दीवानी थी ,
नागर नागर रटकर जहर को  अमृत बना डाला ,
मंथन करके नागर ने फटे दूध को घर्त बना डाला ,
रानी पदमावति की बात निराली थी ,
रण के दिन हुई रात काली थी ,
झूठे झंडे देखकर भी  ज़ोहर कर डाला था ,
पतिव्रता से हम्मीर को भाव विभोर कर डाला था ,
विश्वसुन्दरी पद्मिनी की क्या गजब जवानी थी ,
परछाई भी उसकी क्या अजब सुहानी थी ,
हिन्दुस्तान क्या ,राजस्थान काफी है इतिहास रचने में ,
वीरो को छोड़ो भरी पड़ी है नारिया दुश्मनों का नाश करने में 



बीकानेर का इतिहास सुनाने वाला हूँ ,

सदियों से लाज बचाता जो भारत माँ के आन की ,
चन्दन से प्यारी है , मिट्टी  मेरे राजस्थान की ,
देशनोक की फिजा से सजा माँ का दरबार है ,
सोने सी मिट्टी में रच रच बसा माँ का प्यार है ,
देश की सीमा का प्रहरी माँ की लाज बचाता है ,
रसगुलो के स्वाद से दुनिया पर राज चलाता है ,
जहा जवानी में राजा गंगा ने गंगानगर बसाया था ,
छाती पर जूती रखकर करनीने कहर बरसाया था ,
कोलायत की धरती पर कपिल मुनि  का धाम है,
ऊन मंदी का दुनिया में चलता बड़ा नाम है ,
लाडेरा के धोरो पर ऊट उत्सव चले बड़ा अभियान है ,
ऐसी सम्राथल धरा पर नागर को स्वाभिमान है ,

 

कॉलेज की लडकिया

कोलेज की लड्किया रखती है गरज ,
खाने के नाम पर नहीं करती है अचरज ,
इसलिए बॉय फ्रेंड बदलती हर बरस ,
कभी गन्ने , आम का मिलता जो सरस ,
सलाह दे रहा हु नागर को आ गया तरस ,
पढाई करना कॉलेज में नहीं तो बेचोगे चरस ,

Tuesday, February 14, 2012

मेरी कलम डरपोक नहीं ,,,,,,,,,,,,,,,

मेरी कलम डरपोक नहीं ,जो डर जाती अत्याचारी तलवारों से ,
मेरी कलम वो नोक नहीं, जो मर जाती लाचारी सारो से ,
मेरी कलम पर वो रोक नहीं , जो भर जाती खुद्दारी श्रंगारो से ,
मेरी कलम वो शोक नही , जो तर जाती मक्कारी पतवारों से ,
भरा पड़ा है जोश मुझमे धरती माँ के गीत गाने को ,
चल पड़ेगी कलम मेरी दुश्मनों का दिल जीत लाने को ,
में किसान का लाल हू , बंजर को उपजाऊ बनाने वाला हू ,
में नफरत की दिवार नहीं, राम रहीम को एक करने वाला हू ,
झूठी कविताएं लिखने से कवि, साहित्य का प्रधान नहीं होता ,
जाने क्यों कलमकारों की भाषा में किसान नहीं होता ,
कवि लेखक भी  इस बात से अनजान नहीं होता ,
फिर भी हिम्मत नहीं हारूँगा ,जोकर को जोकर लिखूंगा ,
मनमोहन को पीएम नहीं कहूँगा, नोकर को नोकर लिखूंगा ,
मेरी कलम खुनी खंजर है, राष्ट्र्कपुतो  की छाती पर चलेगी ,
मेरी लों में वो मंजर है ,    बिना घी  की बाती पर जलेगी ,
मेरी कलम डरपोक नहीं .......                                 ,
  ......                                       खुद्दारी पतवारों से ,!

मै अन्ना हू,,,,,,,,,,


अन्ना तेरे अनशन में देखी ताकत सरकार की ,
देखा संसद में गुण्डे,ग्वारो की भरमार थी ,
कहकर यही ओमपुरी ने संसद को धिक्कारा था ,
किरणबेदी ने भी ओढ़ दुपट्टा गजब का तीर मारा था ,
इसलिए सांसदों ने लगाया झूठा धारा था ,
"में अन्ना हु " यही देश का नारा था ,
भ्रष्टाचार मिटाना तो अन्ना का जयकारा था,
भ्रष्टाचार लड़ाई में अन्ना के साथ देश सारा था 
केजरीवाल ने भी सरकार को ललकारा था ,
रामदेव भी आ गया था ॐ नाम उसे प्यारा था ,
आमिर खान भी अन्ना के समर्थन पर वारा था,
मनीष तिवारी बहक गया ,चढ़ा जो उसका पारा था ,
राहुल की जबा पर लगा बोल का ताला था ,
सिब्बल , दिग्विजय ने चलाया शब्दों का आरा था ,
कांग्रेस सरकार को दिखा दिया  दिन का तारा था ,
अन्ना के अनशन पर चढ़ा गजब का परवान था ,
क्रिकेट पेर्मी तक भूल गए थे की कोंन ब्रायन लारा था ,
अन्ना के अनशन में अन्ना ही गाँधी  का अवतार था ,
भ्रष्टाचार मिटाने से ही देश का भवपार था ,
भ्रष्टाचार लड़ाई में अन्ना देश का करतार था ,
रह गयी सोनिया अकेली न कोई उसका भरतार था ,
मेधा पाटेकर ने भी सरकार को फटकारा  था ,

अन्ना के इक दीवाने ने खुद को जलाकर मारा था , 
मनमोहन नजारा देखे बेठा_बेठा कार में ,
सोनिया गांधी भूल गयी अनशन को श्रंगार में,
अन्ना के दिवानो से भरा दिल्ली दरबार था ,
पुलिस निशाना अन्ना को भगाना हरबार था ,
किरण बेदी ने याद दिलाया जय माता की बोलकर ,
देखो पुलिस वालो कानून को ढंग से खोलकर ,
नहीं खायी थी कसमे तुमने आपनो को बेचकर ,
रामदेव के अनशन में मर्यादा तार -तार की थी ,
भारत माँ के दीवानों पर तलवारे आरपार की थी ,
इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने फटकार बार -बार दी थी ,
पाला हे माताओ ने पसीनो से तुम्हे सिचकर ,
थप्पड़ मारो मंत्रियो के दात अपने भीचकर , 
सबक सिखा दो लम्बे कुर्ते खीचकर ,
मोका हे मोक्ष पाने का भट्टी  में इनको झोंककर,
मज़ा लो जिन्दगी का गर्दन इनकी नोचकर ,
कुछ नहीं होगा तुम्हारा रह जायेंगे ये भोक्कर ,
अन्ना तेरे अनशन में देखी ताकत सरकार की ,
देखा संसद में गुण्डे भड्वो की भरमार थी ,
अगर दम रखती सरकार देह में ,
ना फसती राजनीति के मोह में 
भीड़ लेती चाइना -पाक से ,
ना लहराने देती झंडा वतन लेह में 

"जय हिंद " जय भारत "
WRITTEN BY-- "RAMAVTAR NAGAR 

Sunday, February 12, 2012

हिन्दुस्तानी हु ,,

मुझे प्यारा है हिन्दू ,तो प्यारा है मुसलमान , 
मुझे प्यारा नहीं हेवान , मुझे प्यारा है इंसान 

किसान का बेटा हु ,,,,,,


मैंने देखी है, हिम्मत धरणीधर के लालों की ,
बीज बो देते है , छाती फाड़कर के अकालों की ,

में छोरा ग़ाव का ,,,,,,,,,

में छोरा ग़ाव  का क्या जानु प्रपोज ,
में जानु शक्कर , न जानु ग्लूकोज ,

किसान का बेटा हु ,,,,

 मैंने देखी है, हिम्मत धरणीधर के लालों की ,
बीज बों देते है, छाती फाड़कर अकालो की