उठती है शुभवेला में ,
उठकर ,छाछ बिलोकर
चाय बनाकर ,
जगाकर, मुझे पिलाती है ,
भेसो को चारा डालना ,
गोबर पानी करना ,
खाना बनाना ,
रोटी कपडे में बांदकर,
गुड प्याज रखकर ,
खेत पर ले जाती है ,
दिनभर खेतो में काम ,
शाम को चारा काट ,
पोटली बाँध
सर पर रखकर ,
गोधुलिवेला में ,
बैलो के पैर से उडती हुई
धुल के पीछे पीछे आती है ,
हारी थकी हुई ,
भेसो का दूध निकालती है ,
गर्म कर जावण देती है ,
कभी शकरकंद ,
तो कभी मूंगफली खिलाती है ,
फिर थपकी देकर मुझे सुलाती है
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