मेरी कलम डरपोक नहीं ,जो डर जाती अत्याचारी तलवारों से ,
मेरी कलम वो नोक नहीं, जो मर जाती लाचारी सारो से ,
मेरी कलम पर वो रोक नहीं , जो भर जाती खुद्दारी श्रंगारो से ,
मेरी कलम वो शोक नही , जो तर जाती मक्कारी पतवारों से ,
भरा पड़ा है जोश मुझमे धरती माँ के गीत गाने को ,
चल पड़ेगी कलम मेरी दुश्मनों का दिल जीत लाने को ,
में किसान का लाल हू , बंजर को उपजाऊ बनाने वाला हू ,
में नफरत की दिवार नहीं, राम रहीम को एक करने वाला हू ,
झूठी कविताएं लिखने से कवि, साहित्य का प्रधान नहीं होता ,
जाने क्यों कलमकारों की भाषा में किसान नहीं होता ,
कवि लेखक भी इस बात से अनजान नहीं होता ,
फिर भी हिम्मत नहीं हारूँगा ,जोकर को जोकर लिखूंगा ,
मनमोहन को पीएम नहीं कहूँगा, नोकर को नोकर लिखूंगा ,
मेरी कलम खुनी खंजर है, राष्ट्र्कपुतो की छाती पर चलेगी ,
मेरी लों में वो मंजर है , बिना घी की बाती पर जलेगी ,
मेरी कलम डरपोक नहीं ....... ,
...... खुद्दारी पतवारों से ,!
Acchi hai Ramavtar,,,
ReplyDeletethanks bhai
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