Thursday, March 1, 2012

सुनो सुनो मेरी माँ की कहानी


 ,
पेट में रखकर ,
तगारी फेकती रही ,
कभी सरसों कटाई ,
भारी- भरकम वजन ,
पांच महीने का हुआ ,
पीछे बांधकर काम करती ,
खेत में तीन डंडो पर ,
तरपाल डालकर ,
झोपडी बनकार सुलाया ,
घर पर चूल्हे पर रोटी बनाती ,
मुझे पलंग पर लुगड़ा बांधकर ,
झोली में सुलाया ,
रोने पर झोली में घुघरा डालकर ,
थाली का बजाना ,
झोली को रस्सी से झुलाना ,
उलटी होने पर ,
मुल्ला की फ़ूक ,
चूल्हे में लाल मिर्च झोकना ,
तेल वार बजरंग के चढ़ाना ,
पलंग से गिरा ,खुद रोयीं,
चोट लगी तो आंसू भर लाती ,
पांच का हुआ ,
छाछ बिलोते वक्त,
जेठानी के डर से ,
चुपके से दही खिलाना ,
मेरे मिट्टी से सने चेहरे को ,
पानी डालकर अपने पल्लू से ,
साफ करती थी ,
एक रुपया देकर पढने भेजना ,
भुम्भाठे पाड़ने पर ,
मेरी चप्पल एक हाथ में ,
एक हाथ में कट्टे का थेला,
गोद में, मै रोता हुआ ,
स्कूल में रखकर आती थी ,
आठ साल का हुआ ,
घी में रोटी चूरना,
आँखे बंध करवाकर ,
चीज़ देना ,
मिट्टी में खेलता ,
हाथ फटने पर ,
माँ गर्म घी ,ग्रीस लगाती ,
भुखार आने पर ,
गोली न लेने पर ,
पीसकर पिलाती थी ,
मेला आने पर
दस रूपये खर्ची देना ,
खेत से चने सेककर ,
गेहू सेककर लाती ,
कभी बेर भी खिलाती ,
गन्ने को छीलकर खिलाती ,
मेरे कारण पडोसी से लड़ना ,
पन्द्रह साल का हुआ ,
मुझे बाहर पढने को भेजकर ,
खुद को रुलाया ,
जाने से पहले कहती है ,
अपना ध्यान रखना ,
मोका मिलते ही ,
मिलने आती हूँ ,
सेहत का ख्याल रखना ,,
दूध की बंदी लगालेना ,
बुखार आये तो डॉक्टर को दिखाना ,
परेशानी हो फ़ोन करना ,
रस्ते आना , रस्ते जाना ,
साधनों से बचकर रहना ,
मोबाइल पर नंबर मिलाना वह जानती नहीं ,
पर हिचकी से याद करती है ,
कहती है दिवाली पर आजाना ,
फसले हरी भरी है ,
भुट्टे भरने लग गए है ,
खां जाना ,
मेरे गाव जाने पर सर पर हाथ फेरती है ,
मिठाई बनाकर लाती है ,
हाथी से खिलाती है ,
मेरे जुकाम होने पर ,
चाय का काढ़ा बनाकर ,
पिलाती है ,
कहती है ,विश्वास है जब तक तू नोकरी नहीं लगेगा ,
तब तक खेतो मी दिन रात काम करुँगी ,
ऐसे तो बुडापा आ गया ,
पर तेरी आस में ,
बुडापे का अहसास न होने दूंगी ,
बाबा से नोकरी की मन्नत मांगी है ,
हर साल पैदल जाउंगी ,
मै कम खालुंगी ,
पर तू फल फुल खाते रहना ,
मेरे वापिस आने के समय अजब कहानी बनती है ,
मेरी माँ मूंगफली -नमकीन से थेला भरकर लाती है ,
केतली में घी लड्डू भी बाँध देती है ,
मेरे लिए चुपके से ,
बाबी भेया के डर से ,
नरेगा व् दूध बेचकर जो पैसे बचाती है ,
लाकर देती है ,
मुझे जाने के लिए कहने से पहले ,
आँखों में आंसू भर लेती है ,
मुंह मसोस कर रह जाती है ,
मेरे रस्ते को शाम तक ताकती रहती है ,
मेरी फोटो की धुल को फटकारती है माँ ,
खाना सबका बनाती है ,
पर खा नहीं पाती है ,
मेरी याद में रोती रहती है ,
मेरे लिए कितनी विपदा उठाती है माँ ,
ऐसी है दोस्तों मेरी माँ ,

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