रण की घाटी में एक हाथी गर्जन करता था ,
सुन चिघाड़ उसकी हर मुग़ल नंदन डरता था ,
पर हिन्दू जो ठहरा था हर अरि का अभिनन्दन करता था ,
त्रिनेत्र गणेश की पूजा से हर रोज वंदन करता था ,
आता था जब गुस्सा उसके वन में हर शेर क्रंदन करता था,
औरंगजेब भी उसे हाथ जोड़ निवेदन करता था ,
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