Thursday, March 1, 2012

याद करो पिता की यादे ,,,


बचपन में खूब हँसाया,
कंधो पर बैठाकर,
बहुत फुद्काया ,
रोने पर चुटकी चट -चट,
बजाकर सहलाना ,
ज्यदा रोने पर थाप
लेकर डांटना ,
कभी सिखाया , ताली से रोटी बनाना ,
नाक कैसे फुलाते है ,
इसका क्या नाम है ,
नाभि पर गुदगुदी चलाना ,
कभी अपने मुह से पेट पर ,
पुच पुच करना ,
बाय बाय तो वो जानते नहीं ,
पर राम राम सबसे करवाते ,
गर्मी में छोटी कुर्ती ,
सर्दी में जर्सी ,
कभ नयी चड्ढी ,
कभी क्या लाना ,
कभी टनाटन कभी कुरकुरे ,
कभी केले लेकर आना ,
मुझे बाहर ले जाने से पहले ,
मम्मी से आँखों में तवे का काजल ,
कभी काला टीका लगवाना ,
चलता कभी गिरता ,
घुटने पर खून निकलता ,
तो नीम की छाल ले आते ,
घिसकर मल्हम लगाते ,
पापा के साथ रोज मंदिर जाना,
पापा ने ढ़ोक देना सिखाया ,
उनको देख चन्दन का टीका लगाना ,
उनके साथ प्रसाद खाना ,
पापा मंदिर से भभूत लेकर आते ,
तांत्रिक से एक ताबीज ,
एक कड़ा भी बनवाया ,
बरसात के मोसम में ,
बहाव आने पर ,
खेत से लोटते वक्त,
पापा की पीठ पीछे झुलना ,
बहिना से झगड़ा हुआ ,
दस रूपये दे दोनों को समझाया ,
भेस को चराते वक्त ,
लकड़ी लेकर पापा के ,
आगे आगे चलना ,
पाप के हाथ में चुगे की थाली ,
उनको देख में भी भर मुट्ठी ,
चुगा डालता था ,
पापा गए कबूतर उड़ाता था ,
स्कूल जाने लगा ,
रोज बना बहाना ,
पापा से स्लेट बाती
के पैसे माँगना ,
न देने पर स्कूल न जाना ,
झंडा भी आया ,
नए जुते, नए रिबन लाना ,
बिना मांगे मेरे उत्साह को देख ,
हर चीज़ ले आते
कहते हमारे लिए लड्डू लेकर आना ,
कभी उनके आगे साईकल पर बेठना ,
अपना तोलिया डंडे पर बाँधा ,
मुझे बिठाया ,
मोटर साईकल पर पीछे
पेट पड़कर बेठना .
खूब साईकल सवारी करवाना
थोडा समझदार हुआ ,
अर्द्वार्षिक में ग्रेस लगी ,
पापा के हस्ताक्षर पर
खुद का नाम लिखना
पापा की जली बीड़ी
का सुट्टा मारना ,
कुर्ते से पैसे चोरना ,
पंद्रह साल का हुआ ,
पढ़ाने के लिए शहर ले आये ,
सर पर भारी बोऱा,
एक हाथ में सन्दूक,
पसीने से तरबतर ,
गली गली में घुमे ,
फिर किराए पर कमरा मिला
पापा ने सामान जमवाए,
फिर ढूंढते ढूंढते स्कूल मिला ,
चश्मे वाले को पापा ने
हाथ जोड़ नमस्कार किया ,
चश्मे वाले ने गर्दन हिलायी,
उससे कहा इसे पढाना हें,
पैसे की जिम्मेदारी हमारी ,
पढाने की जिमेदारी आपकी ,
फिर मैंने पापा से पांच हज़ार मांगे ,
पापा ने दस हज़ार दिए ,
बोले परेशान मत होना ,
खूब खाना खूब पढना,
रस्ते में सोना भी मिल जाए
तो ठुकरा देना ,
फिर दोनों ने ढाबे पर खाना खाया ,
बस आयी, बोले अब चलता हूँ ,
ध्यान रखना ,
मेरी आँखे आंसुओं से डबडबा गयी ,
पापा का चेहरा उतर गया ,
वो बस में चढ़े ,
मै उन्हें देखता रह गया ,
पापा ने भी देखा ,
देखते देखते बस चली गयी ,
मै मन ही मन बहुत रोया ,
रात भर नींद न आयी ,
पापा का सपना याद आने लगा ,
की नोकरी लगने पर हमे चार धाम
की यात्रा कराएगा ,
चार पहियों की गाडी मै घुमायेगा ,
फिर सोचा की सचमुच पाप का स्थान
आसमान से ऊचा क्यों है

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